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इन 4 कारणों से माँ की पूजा में क्रोध आता है

 

बजरंगबली की कृपा सदैव बनी रहे क्या मां काली की पूजा में क्रोध आता है और यदि मन की पूजा में क्रोध आता है तो उसके पीछे का क्या कारण है क्या रहस्य है आज बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के ऊपर हम बात करेंगे

मुझे सत्य है की मां की पूजा में क्रोध आता है और यह मन की पूजा के प्रारंभिक लक्षण है जब हम मां की सेवा शुरू करते हैं तो प्रारंभ में बहुत क्रोध आता है चाहे कितना भी शांत प्रवृत्ति वाला व्यक्ति हो उसे भी क्रोध आता है

लड़कियां हैसबसे पहला कारण देखिए हर देवी देवता की अपनी एक ऊर्जा होती है जिसे उसे देवी या देवता का मूल तत्व कहते हैं जैसे भगवान श्री पृथ्वी तत्व के देवता है भगवान सूर्य आकाश तत्व से संबंधित है भगवान

गणेश जल तत्व के देवता है इसी प्रकार मां काली अग्नि तत्व की देवी है और जब हम मां की पूजा शुरू करते हैं प्रारंभ करते हैं तो यह अग्नि तत्व हमारे अंदर जागृत होने लगता है ज्यादा सक्रिय होने लगता है फल स्वरुप

क्रोध आता है अग्नि की अगर बात करें तो अग्नि को एक खतरे के रूप में भी देखा जाता है अगर इसे ठीक से नहीं संभाला जाए तो यह भस्म कर देती है लेकिन साथी यही अग्नि जीवन के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है हमारी

जीवित होने का प्रमाणिक यह है कि जब तक हमारा शरीर गर्म है हम जीवित है एक मृत शरीर में कोई गर्मी नहीं होती कोई अग्नि नहीं होती तो आप समझ सकते हैं की अग्नि तत्व किस प्रकार से मनुष्य जीवन के लिए बहुत

महत्वपूर्ण है और मां इसी अग्नि तत्व कीजब हम मां की पूजा लगातार करते हैं तो यह अग्नि तत्व हमारे अंदर सक्रिय होने लगता है और इसके फलस्वरूप जो अपनी तत्व के गुण हैं जैसे बहुत ज्यादा संघर्ष करने के लिए एक

शक्ति आ जाती है कभी ना हार मानने की प्रवृत्ति आ जाती है संघर्ष की एक इच्छा शक्ति पैदा हो जाती है और साथ ही क्रोध भी पैदा होता है अग्नि तत्व सूर्य से भी संबंधित है जो समस्त ग्रहण का राजा है तो मां की पूजा से एक लीडरशिप की जो प्रवृत्ति होती है वह भी व्यक्ति के अंदर आती है नेतृत्व करने की प्रवृत्ति यानी मां की पूजा जो व्यक्ति करता है